क़ुरआन की कहानियाँ हिंदी में — 114 सूरह की मुफ़्त ईबुक्स
ज़्यादातर लोग क़ुरआन का तर्जुमा तो पढ़ लेते हैं, मगर कहानी नहीं जानते — और इसी लिए आयतें दिल तक नहीं उतरतीं। आप पढ़ते हैं "अबू लहब के दोनों हाथ टूट जाएँ" और आगे बढ़ जाते हैं। मगर अगर आपको मालूम हो कि उस दिन सफ़ा पहाड़ी पर क्या हुआ था, किसने क्या कहा था, और वो पेशीनगोई दस साल तक कैसे खुली चुनौती बनी रही — तो वही आयत आपको हिला कर रख देती है।
इसी कमी को पूरा करने के लिए नूरानी इल्म पर 114 सूरह की मुकम्मल कहानी-शैली ईबुक्स तैयार की गई हैं — और सब बिल्कुल मुफ़्त।
हर ईबुक में क्या मिलेगा
एक नज़र में सूरह — नाम, आयतों की तादाद, मक्की या मदनी, और चुनी हुई अहम आयतें तर्जुमे के साथ।
पूरी कहानी — नुज़ूल का पस-मंज़र, वो वाक़िआत जिनके दरमियान यह सूरह उतरी, और उलमा के तफ़्सीरी नुक्ते — मगर आसान ज़ुबान में।
हिंदी तर्जुमा और लिप्यंतरण — ताकि जिन्हें अरबी नहीं आती वो भी लफ़्ज़ों की मिठास महसूस कर सकें।
"इस सूरह से क्या सीखा" — सात अमली सबक़, आपकी रोज़मर्रा ज़िंदगी के लिए।
और अंदाज़? जैसे कोई बुज़ुर्ग बड़े प्यार से बैठा कर सुना रहा हो — इसीलिए यह बच्चों और नए पढ़ने वालों के लिए भी बिल्कुल मुनासिब है।
कुछ कहानियाँ जो आप नहीं भूलेंगे
सूरह अल-फ़ील — अबरहा का हाथी मक्का की तरफ़ बढ़ रहा है, और अब्दुल मुत्तलिब उससे अपने ऊँट माँगने आते हैं। अबरहा हैरान होता है — और वो जवाब देते हैं: "मैं ऊँटों का मालिक हूँ। और उस घर का भी एक मालिक है जो उसकी हिफ़ाज़त करेगा।"
सूरह अल-बुरूज — ख़ंदक़ में आग जल रही है, और एक माँ अपने दूध पीते बच्चे को गोद में लिए किनारे पर झिझक जाती है। और अल्लाह उस बच्चे को गोयाई दे देते हैं: "ऐ माँ, सब्र कीजिए — बेशक आप हक़ पर हैं।"
सूरह अल-मुजादिला — एक बूढ़ी औरत अपनी फ़रियाद ले कर आती है। आइशा (रज़ि०) कमरे के कोने में मौजूद थीं और कहती हैं कि उनके कुछ अल्फ़ाज़ मुझ तक भी न पहुँचे — मगर अल्लाह ने उसे सात आसमानों के ऊपर से सुन लिया, और उसी की वजह से क़ानून बदल गया।
सूरह अल-हश्र — एक अंसारी सहाबी के घर मेहमान आया, और खाना सिर्फ़ बच्चों जितना था। उन्होंने चिराग़ ठीक करने के बहाने उसे बुझा दिया, और अँधेरे में मियाँ-बीवी ऐसे मुँह हिलाते रहे जैसे खा रहे हों — ताकि मेहमान पेट भर कर खा सके।
सूरह 'अबस — एक नाबीना ग़रीब सहाबी बीच गुफ़्तगू में आ जाते हैं, नबी ﷺ हल्का सा त्योरी चढ़ाते हैं — और आसमान से इस्लाह उतर आती है। और उसके बाद आप ﷺ उन्हें देख कर फ़रमाते: "ख़ुश-आमदीद उस शख़्स को जिसकी वजह से मेरे रब ने मेरी इस्लाह फ़रमाई।"
ये किन के लिए हैं
उन के लिए जो क़ुरआन समझ कर पढ़ना चाहते हैं। उन वालिदैन के लिए जो बच्चों को दीन से जोड़ना चाहते हैं। उन नए पढ़ने वालों के लिए जिन्हें अरबी नहीं आती। मुअल्लिमीन और मदरसों के उस्तादों के लिए। और उन सब के लिए जो रोज़ाना दस मिनट का एक दीनी मामूल बनाना चाहते हैं।
कैसे हासिल करें
वेबसाइट के ईबुक्स पेज पर जाइए, अपनी ज़ुबान चुनिए — हिंदी, इंग्लिश या हिंग्लिश — और सूरह पर क्लिक कर के PDF डाउनलोड कर लीजिए। फ़ाइलें A5 साइज़ और प्रिंट-फ्रेंडली हैं, तो आप इन्हें छपवा कर तक़सीम भी कर सकते हैं।
न कोई फ़ीस। न रजिस्ट्रेशन। न विज्ञापन। यह सब सदक़ा-ए-जारिया है — और अगर आप इसे किसी और तक पहुँचाते हैं, तो उसका अज्र भी इंशाअल्लाह आप तक पहुँचेगा।
और ऑनलाइन क़ुरआन भी
इसी वेबसाइट पर आप पूरा क़ुरआन ऑनलाइन भी पढ़ सकते हैं — सूरह-वार और पारा-वार — और साथ में उर्दू तर्जुमे का ऑडियो भी सुन सकते हैं। तिलावत सुनिए, तर्जुमा समझिए, और फिर उसी सूरह की कहानी वाली ईबुक पढ़ लीजिए। तीनों मिल कर वो असर पैदा करते हैं जो अकेला तर्जुमा कभी नहीं करता।
नबी ﷺ ने फ़रमाया कि जो किसी भलाई की तरफ़ राह दिखाए, उसे उस पर अमल करने वाले जितना अज्र मिलता है। तो अगर यह काम आपको फ़ायदेमंद लगे — इसे आगे बढ़ा दीजिए।